यूपी के 400 से अधिक महाभ्रष्ट अफसरों की लिस्ट तैयार, पूर्वांचल से योगी का ऑपरेशन क्लीन शुरू

बी.के.सिंह। यूपी में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उखाड़ फेंकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्ट अफसरों की एक लिस्ट तैयार करवाई है। इस लिस्ट में 400 से ज्यादा भ्रष्ट अफसरों का नाम है जिनकी हैसियत 100 करोड़ से ऊपर बताई जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में सबसे ज्यादा 70 से अधिक अफसर अकेले परिवहन विभाग के हैं। इन अफसरों ने सत्ता के गलियारे में मजबूत पकड़ बनाकर भ्रष्टाचार के जरिए अकूत संपत्ति तैयार की है।

 

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फिलहाल यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल की धरती से ऑपरेशन क्लीन शुरू कर दिया है। ऑपरेशन क्लीन के पहले शिकार चंदौली के एआरटीओ आरएस यादव बने हैं। पिछले दो  दशक से सरकार चाहे किसी की भी रही हो लेकिन पूर्वांचल की सड़क पर सिक्का आरएस यादव का ही चलता था। आरएस यादव समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता और पूर्व मंत्री के रिश्तेदार हैं। आरएस यादव की हैसियत 500 करोड़ से ज्यादा की बतायी जा रही है। बताया जा रहा है कि आरएस यादव ने अपनी काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए अधिकांश प्रापर्टी अपने रिश्तेदारों और करीबी नौकरों के नाम से खरीदा है। शुरूआती जांच में वाराणसी में तारांकित होटल, पांच प्लॉट और गोरखपुर में शॉपिंग- हाउसिंग कांप्लेक्स, लखनऊ, नोएडा में फ्लैट समेत करोड़ों के साम्राज्य का पता चला है।

 

डायरी से खुला हर महीने करोड़ों की काली कमाई का राज

आरएस यादव की गाड़ी में मिली डायरी से हर महीने करोड़ों की काली कमाई का सच सामने आया है। पता चला है कि नौबतपुर चेकपोस्ट से अब तक वही ओवरलोड ट्रक पास होते रहे जिसे आरएस यादव चाहते थे। खास तौर पर पांच बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के ढाई हजार ओवरलोड ट्रकों को वे हर महीने नौबतपुर चेकपोस्ट से पास कराते थे। एक ट्रक से सात हजार रुपये की वसूली की जाती थी। केवल इन्हीं ट्रकों से हर माह पौने दो करोड़ रुपये की अवैध वसूली का खुलासा हुआ है।

लखपति जेई से अरबपति परिवहन अधिकारी तक का सफर

आरएस यादव 23 साल पहले जल निगम में जेई हुआ करते थे उस समय उनकी हैसियत लाखों में थी। 1994 में पांच साल के लिए उन्हें प्रतिनियुक्ति पर संभागीय परिवहन कार्यालय वाराणसी में बतौर आरआई भेजा गया था। बाद में शासन में पैरवी कर इन्होंने खुद को परिवहन विभाग में ही समायोजित करा लिया। इसी विभाग में प्रमोशन पाकर एआरटीओ बन गए। 1994 से 2017 तक की नौकरी में 19 साल तक उनका कार्यक्षेत्र वाराणसी और चंदौली ही रहा। बाकी के चार साल भी गाजीपुर और भदोही में गुजारे। पिछले बीस सालों में आरएस यादव ने वाराणसी समेत पूर्वांचल में करोड़ों की संपत्ति बना ली है।

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