अपने ही विभाग के इन दो बड़े अफसरों की गिरफ्तारी के लिए कई प्रदेशों में लगातार छापेमारी कर रही है यूपी पुलिस

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लखनऊ। अपने ही विभाग के दो बड़े अफसरों को गिरफ्तार करने के लिए यूपी पुलिस कई प्रदेशों में लगातार दबिश दे रही है लेकिन ये अफसर पुलिस के हाथ नहीं लग रहे हैं। पुलिस की टीमें उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही हैं और वे अपराधियों की तरह भागते फिर रहे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि यह प्रदेश में पहली बार हुआ है जब मुख्यमंत्री के निर्देश पर आईपीएस अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हे गिरफ्तार करने का प्रयास हो रहा है।

दरअसल वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अफसर अरविन्द सेन और वर्ष 2014 बैच के आईपीएस अफसर मणिलाल पाटीदार पर गंभीर आरोप लगे हैं। दोनों अफसर अलग-अलग मामलों में अभियुक्त हैं और यूपी पुलिस इनको गिरफ्तार करने के लिए लगातार दबिश दे रही है। अरविन्द सेन पर पशुपालन विभाग में टेंडर के नाम पर ठगी और भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है तो वहीं महोबा के एसपी रहे मणिलाल पाटीदार पर भी भ्रष्टाचार एवं आत्महत्या के लिए मजबूर करने का गंभीर आरोप लगा है।

अरविन्द सेन पर ठगी और भ्रष्टाचार के मामले में लखनऊ के हजरतगंज थाने में 13 जून को मुकदमा दर्ज हुआ था। वह एसटीएफ की जांच में दोषी पाए गए थे। अग्रिम जमानत के लिए दायर उनकी अर्जी कोर्ट से निरस्त हो गई है। पुलिस की कई टीमें लखनऊ, फैजाबाद व अंबेडकरनगर तक उनकी तलाश कर रही हैं। अरविन्द सेन फैजाबाद के रहने वाले हैं और पूर्व सांसद स्व. मित्रसेन यादव के पुत्र हैं।

वहीं दूसरी तरफ महोबा के एसपी रहे मणिलाल पाटीदार के खिलाफ 10 सितंबर को मुकदमा दर्ज हुआ था। महोबा के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के बाद मणिलाल के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में जांच के लिए आईजी रेंज वाराणसी विजय सिंह मीणा की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने भी उन्हें भ्रष्टाचार एवं इंद्रकांत को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का दोषी ठहराया। मणिलाल पाटीदार की गिरफ्तारी के लिए महोबा की पुलिस दिल्ली से लेकर राजस्थान तक दबिश दे रही हैं लेकिन वे हाथ नहीं लग रहे हैं।

फिलहाल ये दोनों आईपीएस अफसर अपराधियों की तरह पुलिस से भागते फिर रहे हैं। यूपी पुलिस की कई टीमें इन अफसरों को गिरफ्तार करने के लिए लगातार दबिश दे रही है। लेकिन ये अफसर पुलिस के हाथ नहीं लग रहे हैं।

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