पढ़िए पूर्वांचल के सबसे बड़े डॉन अतीक अहमद के पतन की कहानी..

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कभी प्रयागराज में बाहुबली अतीक अहमद का सिक्का चलता था। लेकिन यूपी में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अतीक अहमद के बुरे दिन शुरू हो गये। योगी सरकार ने बाहुबली अतीक अहमद के पूरे परिवार के अधिकतर लोगों को अपराधी घोषित कर दिया है। इसके साथ अतीक अहमद और उनके करीबियों पर लगातार योगी सरकार का बुलडोजर चल रहा है। अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ पहले से जेल में बंद हैं। सीबीआई पिछले तीन सालों से अतीक अहमद के बड़े बेटे मोहम्मद उमर की तलाश कर रही है। सीबीआई ने उमर की गिरफ्तारी पर दो लाख का इनाम रखा है। वहीं अतीक अहमद के छोटे बेटे मो. अली पर पुलिस ने अब 50 हजार का इनाम रख दिया है। अली की तलाश में क्राइम ब्रांच के अलावा एसटीएफ को भी लगा दिया गया है। बाहुबली अतीक अहमद के बारे में बताया जाता है कि एक समय ऐसा था जब पुलिस, नेता और जज तक उससे खौफ खाते थे।

साल 2012 में अतीक अहमद जेल में था। विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए अपना दल से पर्चा भरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट में बेल के लिए अप्लाई किया। लेकिन हाईकोर्ट के 10 जजों ने केस की सुनवाई से ही खुद को अलग कर लिया। 11 वें जज सुनवाई के लिए राजी हुए और अतीक अहमद को बेल दे दी गई। साल 2015 के सितंबर महीने में एक डबल मर्डर हुआ। यह मर्डर मारियाडीह के प्रधान आबिद की चचेरी बहन अल्कमा और ड्राइवर सुरजीत का था। आरोप लगा कि कम्मू और जाबिर नाम के दो भाईयों ने इस मर्डर को अंजाम दिया है। कम्मू-जाबिर और आबिद प्रधान में पुरानी रंजिश थी। ये दोनों भी पहले अतीक के ही साथ थे लेकिन बाद में अलग हो गए। जाबिर बसपा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। वर्ष 2017 में यूपी में जब योगी सरकार आई तो मारियाडीह डबल मर्डर की फिर से जांच शुरू हुई। इस मर्डर केस को लेकर पुलिस ने जो खुलासा किया उससे सब चौंक गए। पुलिस ने आरोप लगाया कि अल्कमा की हत्या अतीक, अशरफ और आबिद प्रधान ने कराई है। दरअसल अतीक को लग रहा था कि अगर जाबिर चुनाव जीत गया तो उसका वर्चस्व खत्म हो जाएगा। इसलिए अल्कमा को मारने की साजिश रची गई। अल्कमा ने गैर बिरादरी में शादी कर ली थी इस कारण से आबिद प्रधान और उसका परिवार भी उससे खफा था। अतीक, अशरफ और आबिद ने एक तीर से दो निशाना लगाने की साजिश रची। बकरीद के अगले दिन मारियाडीह में अल्कमा की गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई जिसमें अल्कमा और ड्राइवर सुरजीत की मौत हो गई।

साल 2018 के दिसंबर महीने में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कुछ गुंडे मोहित जायसवाल नाम के एक कारोबारी का अपहरण करते हैं और उसे 300 किलोमीटर दूर सीधे देवरिया जेल ले जाते हैं। देवरिया जेल में कारोबारी की जमकर पिटाई की जाती है और उससे सादे कागज पर साइन करवाया जाता है। इस दौरान पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया जाता है। ऐसा करने का मकसद यह था कि लोगों में दहशत बनी रहे। इस वारदात के बाद कारोबारी मोहित जायसवाल ने आरोप लगाया था कि उनका अपहरण अतीक अहमद ने करवाया था। इस घटना के बाद अतीक अहमद को देवरिया से बरेली जेल भेजा गया। बरेली जेल प्रशासन ने अतीक को रखने से हाथ खड़े कर दिए। जिसके बाद अतीक को इलाहाबाद के नैनी जेल में शिफ्ट कर दिया गया। उधर देवरिया जेल कांड का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। कोर्ट ने सीबीआई को मुकदमा दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया। अतीक अहमद और उनके बेटे के अलावा 4 सहयोगियों और 10-12 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। 23 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश दिया कि अतीक अहमद को यूपी के बाहर शिफ्ट किया जाए। इसके बाद यूपी सरकार ने 3 जून 2019 को उसे अहमदाबाद की साबरमती जेल में शिफ्ट कराया। अतीक अहमद इस समय गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। अतीक भले ही नेता बन गया था लेकिन वो कभी माफिया वाली अपनी छवि से बाहर नहीं आ पाया। सियासत की आड़ में अतीक अपना आपराधिक साम्राज्य और मजबूत करता रहा। यही वजह है कि उसके ऊपर दर्ज अधिकतर मुकदमे विधायक-सांसद रहते हुए दर्ज हुए हैं। लोग कहते हैं कि वो अपने विरोधियों को हर हाल में छोड़ना नहीं चाहता था। जो भी अतीक के खिलाफ सिर उठाने की कोशिश करता वह मारा जाता। समय का चक्र बदला और आज अतीक अहमद का आर्थिक और आपराधिक साम्राज्य लगातार ध्वस्त हो रहा है।

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