ये वहशी हिंदू धर्म के दुश्मन हैं, इन्हें न इतिहास पता है न संस्कृति..

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जयश्री राम का नारा देकर किसी की हत्या करने वाले इंसान और धर्म दोनो के घृणित हत्यारे हैं। ये संस्कृति के हत्यारे हैं। ये हिन्दू तालिबान या हिन्दू ISIS हैं। जैसे तालिबान और ISIS इस्लाम के दुश्मन हैं, वैसे ही ये वहशी हिंदू धर्म के दुश्मन हैं। इन्हें न इतिहास पता है न संस्कृति। इन्हें हिंदू धर्म के टिके होने और विराट होने की वजह भी नही मालूम।

ये शिवा जी को जानते हैं मगर ये नही जानते कि शिवाजी के तोपखाने के सरदार का नाम इब्राहीम खान था और उनकी नौसेना की कमान एक मुसलमान सिद्दी संबल के हाथ थी जिन्होंने हर सांस उनका साथ दिया। ये यह भी नही जानते कि जब शिवाजी आगरा के किले में नजरबंद थे तब कैद से निकल भागने में जिन दो व्‍यक्तियों ने उनकी मदद की थी उनमें से एक मुसलमान थे, उनका नाम मदारी मेहतर था। हिंदुत्व के नाम पर इन दो कौड़ी के टुटपुंजिया कलंकों को ये भी नही मालूम कि इनके फेफड़े की बीमारी से जूझ रहे इनके आराध्य बाल ठाकरे की सांस जोड़ने वाला डॉक्टर जलील पारकर भी एक मुस्लिम था जिसे वे अपने साये की तरह साथ रखते थे। इन्हें ये भी नही पता कि अयोध्या के रामलला की पारंपरिक पोशाक सिलने वाला भी मुसलमान है और राम को ‘इमाम ए हिन्द’ कहने वाला भी एक मुसलमान था।

अब सोचिए, अगर मुसलमान नही रहेंगे तो क्या ऐसे वहशियों का मकसद पूरा हो जाएगा? आप एफआईआर निकलवाकर देख लीजिए। सबसे अधिक अपराध अपने ही परिवार, नात और रिश्तेदारी के बीच है। प्रॉपर्टी के झगड़े में भाई-भाई को मार रहा है। चाचा भतीजे की जान का दुश्मन है। रेप, छेड़छाड़, धोखाधड़ी, चार सौ बीसी…. अपने ही परिचित, जानकार और स्वधर्मियों के साथ इस तरह के घिनौने अपराधों की लाइन लगी हुई है। फिर जय श्री राम का नारा लगाकर मुसलमान को क्यों मार रहे हो? हिंदुत्व के असली समर्थकों को हिंदुत्व को बचाना होगा और उसकी सबसे ज़रूरी कड़ी ऐसी कचरा सोच के लोगों के साथ कचरे जैसा सुलूक करना ही होगा।
(युवा पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के एफबी वॉल से)